जब एकाकीपन में बैठे-बैठे ,
अनायास ही तेरा ख्याल हुआ ।
तब तुझको खोने का ,
मुझे बड़ा मलाल हुआ ।
भेद गई भीतर तक मुझको ,
जब याद वो तेरा सवाल हुआ ।
जय,तू करता है न मुझे पसन्द ?
और सुन के मेरी हर इक बात ।
शायद बहके थे तेरे जज्बात,जो तुने था कहा!
क्यू कहने में की देर बता ?
हाँ! तब तुझको खोने का ,मुझे बड़ा मलाल हुआ ।
फिर तेरा वो समझाना ,
वो प्यार पे भाषण सुनना ।
तब मेरे आँखों का नम हो जाना,
और लबों पे थोड़ी हंसी का आना ।
फिर चुपके से दिल का ये कह जाना,
की देख आज उसे भी तेरा ख्याल हुआ।
तब तुझको खोने का ,मुझे बड़ा मलाल हुआ .......
जय प्रकाश राज ------------
अनायास ही तेरा ख्याल हुआ ।
तब तुझको खोने का ,
मुझे बड़ा मलाल हुआ ।
भेद गई भीतर तक मुझको ,
जब याद वो तेरा सवाल हुआ ।
जय,तू करता है न मुझे पसन्द ?
और सुन के मेरी हर इक बात ।
शायद बहके थे तेरे जज्बात,जो तुने था कहा!
क्यू कहने में की देर बता ?
हाँ! तब तुझको खोने का ,मुझे बड़ा मलाल हुआ ।
फिर तेरा वो समझाना ,
वो प्यार पे भाषण सुनना ।
तब मेरे आँखों का नम हो जाना,
और लबों पे थोड़ी हंसी का आना ।
फिर चुपके से दिल का ये कह जाना,
की देख आज उसे भी तेरा ख्याल हुआ।
तब तुझको खोने का ,मुझे बड़ा मलाल हुआ .......
जय प्रकाश राज ------------
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