{ये कविता उनके लिए है जो अपने नहीं, अपने माँ -बाप की मर्जी से Engg. बन रहे हैं या बन गए है ।}
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अगर आप Engg. हैं ,दोष नहीं है आपका ,
क्यूं की जनाब ,
पैदा होने से पहले ,भविष्य तय था आपका ।
आपका !
गुनाह बस इतना जनाब ,आप लड़का पैदा हो गए ।
और Engg. के रेस में ,
खूद भी एक घोड़ा हो गए ।
गर यकिन न हो मेरे बात का,
खूद जाके देख लो,गर्भ में पल रहे,
हालत किसी निरपराध का ।
कहाँ पता है उसको,जन्मोपरान्त
खूद पहलू होगा एक सिक्के का
अब विनती सुन लो मेरी ,
B.tech की चक्की में पिसने वाले ।
कल रोक लेना खूद को ,
अपने नवजात को पिसने से ।
ढलने देना तुम उनको ,
खूद उनके ही सांचे में ।
बस बन प्रकाश ,तुम राह दिखाना
थाम लेना भ्रमित हो जाने से
फिर एक दिन वो भी नभ में ,
इन्द्रधनुष बन लहराएंगे ।
तब हर्षित हो-हो कर ,इस वसुधा के प्राणी ,
उसके रंगों में रंग जाएंगे ,रंगों में रंग जाएंगे ।
--जय
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अगर आप Engg. हैं ,दोष नहीं है आपका ,
क्यूं की जनाब ,
पैदा होने से पहले ,भविष्य तय था आपका ।
आपका !
गुनाह बस इतना जनाब ,आप लड़का पैदा हो गए ।
और Engg. के रेस में ,
खूद भी एक घोड़ा हो गए ।
गर यकिन न हो मेरे बात का,
खूद जाके देख लो,गर्भ में पल रहे,
हालत किसी निरपराध का ।
कहाँ पता है उसको,जन्मोपरान्त
खूद पहलू होगा एक सिक्के का
अब विनती सुन लो मेरी ,
B.tech की चक्की में पिसने वाले ।
कल रोक लेना खूद को ,
अपने नवजात को पिसने से ।
ढलने देना तुम उनको ,
खूद उनके ही सांचे में ।
बस बन प्रकाश ,तुम राह दिखाना
थाम लेना भ्रमित हो जाने से
फिर एक दिन वो भी नभ में ,
इन्द्रधनुष बन लहराएंगे ।
तब हर्षित हो-हो कर ,इस वसुधा के प्राणी ,
उसके रंगों में रंग जाएंगे ,रंगों में रंग जाएंगे ।
--जय
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